भारत में वैश्विक मंदी का असर “ज्यादा साफ नज़र” आ रहा है, बोलीं IMF प्रमुख

 

वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की नई प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जियॉरजीवा ने मंदी की समस्या पर विचार रखते हुए कहा कि इस वक्त पूरे विश्व की अर्थव्यवस्थाएं ‘समकालिक मंदी’ की चपेट में हैं, लेकिन भारत जैसी सबसे बड़ी उभरती बाज़ार अर्थव्यवस्थाओं में इस साल इसका असर ‘ज़्यादा साफ नज़र’ आ रहा है। क्रिस्टालिना ने कहा कि चौतरफा फैली मंदी का अर्थ है कि वर्ष 2019-20 के दौरान वृद्धि दर इस दशक की शुरुआत से अब तक के ‘निम्नतम स्तर’ पर पहुंच जाएगी। उनके मुताबिक, दुनिया का 90% हिस्सा कम वृद्धि का सामना करेगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था ‘समकालिक मंदी’ की चपेट में
क्रिस्टालिना जियॉरजीवा IMF की MD के रूप में अपना पहला भाषण दे रहीं थीं। उन्होंने कहा “दो साल पहले, वैश्विक अर्थव्यवस्था समकालिक रूप से ऊंचाई की तरफ जा रही थी, और दुनिया का लगभग 75 हिस्सा बढ़ रहा था। अब वैश्विक अर्थव्यवस्था ‘समकालिक मंदी’ की चपेट में है। वर्ष 2019 में हमें लगता है कि दुनिया के लगभग 90 फीसदी हिस्से में वृद्धि कम होगी।” वैश्विक व्यापारिक वृद्धि के बारे में बताते हुए कहा कि यह ‘लगभग थम’ गई है। IMF ने घरेलू मांग बढ़ने की ‘उम्मीद से कम संभावना’ के चलते भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान में वित्तवर्ष 2019-20 के लिए 0.3 प्रतिशत की कमी कर उसे 7% कर दिया है।

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