राजनीतिक द्वेष के चलते आज़म खान को किया जा रहा प्रताड़ित- अखिलेश यादव

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लखनऊ। पूर्व मंत्री व सांसद आजम खां के खिलाफ रामपुर प्रशासन द्वारा दर्ज कराई जा रहीं एफआइआर का मुद्दा तूल पकड़ रहा है। बचाव में आई समाजवादी पार्टी मानसून सत्र में इस मसले को जोरशोर से उठाने की तैयारी में है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले की जांच कराने के लिए 21 सदस्यों की उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन के नेतृत्व वाली यह कमेटी 20 जुलाई को रामपुर पहुंचेगी और मामले की जांच कर तीन दिन में अपनी सौंपेगी।

मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि कमेटी में विधानसभा और विधान परिषद सदस्यों को शामिल किया है, जिसमें प्रदेशाध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, बलराम यादव, दुर्गा प्रसाद यादव, शैलेंद्र यादव ललई, नरेंद्र सिंह वर्मा, रामसुंदर दास निषाद, मोहम्मद रिजवान, ओमकार सिंह यादव, शशांक यादव, तसलीम अहमद, फहीम इरफान, शरदवीर सिंह, नवाब जान, आशुतोष उपाध्याय, नईम उल हसन, उदयवीर सिंह, पुष्पराज जैन उर्फ पम्मी, वासुदेव यादव, राजपाल कश्यप, संजय लाठर और लीलावती कुशवाहा शामिल है।

सपा गुरुवार से शुरू हो रहे विधान मंडल के मानसून सत्र में भी आजम खां के मुद्दे को जोरो-शोर से उठाएगी। बुधवार को विधायकों की बैठक सपा मुख्यालय में शाम चार बजे आयजित की गई है। इस बैठक में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद रहेंगे। सदन में विपक्ष के उत्पीड़न का मुद्दा बना कर अन्य विरोधी दलों को भी साथ लेने की तैयारी है।

रामपुर के आलियागंज के एक और किसान की तहरीर पर पुलिस ने सांसद आजम खां व जौहर यूनिवर्सिटी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी आले हसन खां के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यूनिवर्सिटी की जमीन से जुड़े मामले में यह अब तक यह छठा मुकदमा है। यह मुकदमा ग्राम सींगनखेड़ा मझरा आलियागंज के कल्लन की तहरीर पर हुआ है, जिसमें 26 किसानों की जमीन जबरन कब्जा कर यूनिवर्सिटी में मिलाने का आरोप है। आरोप है कि 15 साल पहले सांसद और पूर्व सीओ ने जबरन उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया और उसे यूनिवर्सिटी की बाउंड्री में मिला लिया। उन्हें व उनके पूरे परिवार के साथ जेल भेजने की धमकी दी। जबरन 10-15 घंटे हवालात में भी बंद रखा गया था।

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